Sorry state of Delhi's women labourers
मैंने इंटरनेट से कुछ तस्वीरें ली हैं जो यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ. यह तस्वीरें ख़ुद ही सब कुछ कह रही हैं.




दिल्ली में मादीपुर नाले के किनारे यह महिलाएं अपने परिवार के साथ रह रही हैं।



परिवार भारतीय समाज का केन्द्र बिन्दु है. परिवार भारतीय सामजिक व्यवस्था का आधार है. अगर परिवार मजबूत नहीं होंगे तो समाज मजबूत नहीं होगा. परिवार टूटेंगे तो समाज भी टूट कर बिखर जायेगा. एक ऐसी असामाजिक व्यवस्था जन्म लेगी जो मनुष्य को फ़िर से जंगल के कानून का गुलाम बना देगी. यह आवश्यक है कि हम सब मिल कर परिवारों के सशक्तिकरण का प्रयास करें.
5 comments:
इन नारियों की चिंता कौन करेगा , सभी आज अपनी.अपनी चिंता में लगे हैं। भगवान ही बतला सकते हैं ,कब इनकी स्थिति सुधरेगी ?
सुरेश जी , आप भी ना,अजी वो तो दुसरो के बसे बसाये घर उजाडने के लिय्र लिखा जाता हे,अब आप ही देखिये ना जब तक शादी ही नही होती तो हमे क्या पता शादी के बाद का सुख,पत्नि क्या होती हे, पति कया होता हे, परिवार क्या होता हे,ओर आजादी क्या होती हे,आप के हर लेख से मे बहुत प्रभावित होता हु,
इन मजदूर महिलाओं के हालात सुधारे बिना नारी प्रगति की बात करना मुझे एक अपराध सा लगता है.इस के अलावा जो महिलाये मजबुरी मे जिस्म फ़रोसी का काम करती हे उन्हे भी तो उस नरक से यही, निकाले ......
संगीता जी, आप की बात बिल्कुल सही है. सब अपनी चिंता में लगे हैं. मैं जब भी यह बात नारियों द्बारा चलाये जा रहे ब्लाग्स पर उठाता हूँ, उनकी भाषा तीखी हो जाती है.
राज जी आप सही कह रहे हैं. शादी ही क्या, हर सामजिक व्यवस्था पर आक्रमण हो रहे हैं.
Sangeeta ji thik kah rhi hai. pahale log apni cinta to kar le. bhut dukh hua ye jankar.
कुछ शिक्षित नारियां समझती हैं कि वह पूरे नारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं और यह प्रतिनिधित्व केवल समाज और पुरूष वर्ग को गालियाँ देकर ही हो सकता है. मैं भी नारी प्रगति का समर्थक हूँ पर इन नारियों की गाली-गलौज से हतोत्साहित हो जाता हूँ.
क्रष्ण
Post a Comment